रेपो रेटवह ब्याज दर जिस पर RBI बैंकों को थोड़े समय के लिए पैसा उधार देता है।
जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए पैसा महँगा होता है और आमतौर पर होम लोन, कार लोन की EMI बढ़ती है। जब घटाता है, तो कर्ज़ सस्ता होने की उम्मीद रहती है। फ़िक्स्ड डिपॉज़िट की ब्याज दरों पर भी इसका असर पड़ता है।
स्मॉल फ़ाइनेंस बैंकRBI से लाइसेंस पाए बैंक जो ख़ास तौर पर छोटे कारोबार, किसानों और कम आय वालों को सेवा देते हैं।
स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक बचत खाता, FD और कर्ज़ जैसी आम बैंक सेवाएँ देते हैं। इनमें जमा पैसा भी दूसरे बैंकों की तरह DICGC बीमा के दायरे में आता है (तय सीमा तक)। RBI इनके लिए अलग नियम बनाता है।
eKYCआधार से ऑनलाइन पहचान की पुष्टि, जो कई सरकारी योजनाओं का पैसा पाने के लिए ज़रूरी है।
eKYC में आपकी पहचान आधार के ज़रिए जाँची जाती है: या तो आधार से जुड़े मोबाइल पर आए OTP से, या अंगूठे/आँख के निशान (बायोमेट्रिक) से, जो जन सेवा केंद्र (CSC) पर होता है। PM-KISAN जैसी योजनाओं में eKYC पूरा न होने पर किस्त रुक सकती है।
LOC (लिस्ट ऑफ़ कैंडिडेट्स)बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों की आधिकारिक सूची, जिसे स्कूल बोर्ड को भेजता है।
CBSE जैसे बोर्ड हर साल परीक्षा से पहले स्कूलों से यह सूची मँगाते हैं। इसमें छात्र का नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि और विषय होते हैं। यही जानकारी आगे एडमिट कार्ड और मार्कशीट में छपती है, इसलिए इसे समय पर और सही भरना ज़रूरी है। नियमित छात्रों की LOC स्कूल भरता है, छात्र ख़ुद नहीं।
VRR नीलामीवेरिएबल रेट रेपो: RBI की नीलामी, जिसमें बैंक तय समय के लिए RBI से पैसा उधार लेते हैं।
जब बैंकिंग व्यवस्था में नक़दी कम होती है, तो RBI VRR नीलामी करता है। बैंक बोली लगाकर पैसा लेते हैं और ब्याज दर नीलामी में तय होती है। इसका आम लोगों पर सीधा असर कम होता है, पर यह बताता है कि बाज़ार में नक़दी की स्थिति कैसी है।