संपादकीय नीति
अंतिम अपडेट: 21 अक्टूबर 2026
हमारे स्रोत
हम केवल ऐसे आधिकारिक स्रोतों से ख़बरें बनाते हैं जिनकी सामग्री श्रेय के साथ दोबारा इस्तेमाल की जा सकती है: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की प्रेस विज्ञप्तियाँ, RBI, SEBI, परीक्षा बोर्ड (CBSE, NTA, यूपी बोर्ड), सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले और अन्य सरकारी वेबसाइटें।
जो हम नहीं करते
- दूसरे समाचार संस्थानों की ख़बरें कॉपी या शब्द बदलकर नहीं छापते। हर ख़बर हमारे अपने शब्दों और ढाँचे में लिखी जाती है।
- सनसनीखेज़ शीर्षक नहीं लगाते।
- बिना पुष्टि के दावे नहीं छापते।
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हर ख़बर में क्या होता है
शीर्षक, दो पंक्तियों का सार, “आपके लिए इसका मतलब”, मुख्य बातें, 2–3 सवाल-जवाब, मूल स्रोत का लिंक, स्रोत का नाम और तारीख़, विषय और ज़िले/राज्य की जानकारी।
जाँच
हर ख़बर छपने से पहले संपादक पढ़ते और मंज़ूर करते हैं। अगर किसी सूचना का अर्थ साफ़ नहीं है, तो ख़बर तब तक रोकी जाती है जब तक संपादक उसे जाँच न लें। हमारी आचार संहिता और सुधार नीति भी देखें।
अदालत के फ़ैसले और विवादित मामले
जब कोई मामला चर्चा या विवाद में होता है, तो कस्बा दूसरे मीडिया की बातें नहीं दोहराता। हम सिर्फ़ आधिकारिक रिकॉर्ड, जैसे अदालत का फ़ैसला या आदेश, सरकारी आदेश या सदन की कार्यवाही, से बताते हैं कि उसमें क्या लिखा है। ऐसी ख़बरों पर “रिकॉर्ड से” लिखा होता है। हम दोनों पक्षों की बातें वैसे ही रखते हैं जैसे रिकॉर्ड में हैं, अंतिम फ़ैसले से पहले किसी को दोषी नहीं कहते, और यौन अपराध के पीड़ितों, बच्चों और किशोरों की पहचान कभी नहीं बताते।